5 साल बाद समाचार चैनलों का भविष्य (Future of News Media)

5 साल बाद समाचार चैनलों का भविष्य (Future of News Media)

“मीडिया” सुनने में बहुत ही मामूली सा शब्द है और आज कि तेज भागती दुनिया में हर व्यक्ति इस शब्द से परिचित भी है । दरअसल,  “मीडिया” एक ऐसा मंच है जिसके ज़रिये देश – विदेश की खबर दुनिया के कोने-कोने में फैलाई जाती है । अगर बात करें इसके शाब्दिक अर्थ कि तो “मीडिया” समाज में खबर पहुँचाने का वो साधन है जिसमें टीवी, रेडियो और समाचर पत्र शामिल है ।

बहुत पुराने काल से ही सूचना पहुंचाने के लिए भिन्न-भिन्न तरीकों का इस्तेमाल किया जाता था, जिसमें आज के मुकाबले काफी समय लगता था मगर समय के साथ-साथ “मीडिया” ने भी अपनी सूचना पहुंचाने की गति में तेज़ी दिखाई है ।  अब तो पलक झपकते ही पृथ्वी के एक छोर की खबर पृथ्वी के दूसरे छोर तक पहुंच जाती है । इसमें दूरदर्शन का बहुत बड़ा योगदान है ।  परंतु आज हम दूरदर्शन के अंधकारमय भविष्य पर चर्चा करेंगे।

क्यों हो जाएंगे समाचार चैनलों 5 साल बाद बंद? (Future of News Media)

जी हां, अगले 5 साल समाचार चैनलों के लिए बेहद महत्वपुर्ण हैं क्योंकि विशेषज्ञों की माने तो समाचार चैनल अगले 5 साल में भारत से लुप्त हो जाएंगे। तो क्या हैं वो कारण? .

1. गुणवत्ता में कमी (Poor Quality)

समय के साथ-साथ समाचार चैनलों की संख्या में भी वृद्धी हुई जिसका असर यह हुआ कि समाचार चैनलों में प्रतियोगिता बढ़ गई। प्रतियोगिता इतनी बढ़ चुकी है कि उसने अब जंग का रूप ले लिया है। जंग जीतने के लिए चैनल कई बार व्यर्थ की खबर दिखातें है।

2. टी-आर-पी की होड (Race for Ranking)

टी आर पी की होड से समाचार चैनल अपने हाथों से अपना पैर काट रहें हैं। ज्यादा से ज्यादा लोगों को आकर्षित करने के लिए बहुत से चैनल अपने वास्तविक पथ से भटक जातें हैं। जिसकी वजह से उपभोक्ता काफी क्रुद्ध हो जाते हैं। समाचार चैनल उनके लिए विश्वसनीय स्त्रोत नहीं रह पाता।

3. विज्ञापनों का है कब्जा (Slave to Advertisements)

विज्ञापनों के जरिए समाचार चैनल बहुत से पैसे कमाते हैं। और पैसे को ज्यादा महत्व देने की वजह से समाचार चैनल खबर कम परंतु विज्ञापन ज्यादा दिखाता है। अब तो यह हाल है कि महत्वूर्ण खबरों को तोड़-मरोड़कर ऐसे पेश किया जाता है ताकि ज्यादा से ज्यादा विज्ञापन दिखाया जाए।

4. अश्लीलता का लिया जा रहा है सहारा (Selling sensation to get views)

जैसे पहले भी बताया जा चुका है कि खबर पेशकश में प्रतियोगिता सी छिड़ गई है। और ग्राहकों को लुभाने के लिए अश्लीलता का सहारा लिया जा रहा है। इससे परिवार के साथ समाचार चैनल देखने से लोग परहेज करते हैं। साथ ही वह उस चैनल को आगे कभी देखना पसंद नहीं करते।

5. भरोसे से करते हैं खिलवाड़ (Plays with public emotions)

समाचार चैनल कई मर्तबा ग्राहकों के भरोसे से खिलवाड़ करते हैं। वह ज्यादातर, अभिनेताओं  कि निजी जिदंगी में दखलंदाज़ी करते हैं। जिसके कारण लोग परेशान होते हैं और चैनल देखना पसंद नहीं करते।

क्या खबर पाने का एकमात्र जरिया हैं समाचार चैनल? Alternatives to news channels

जी नहीं, खबर पाने के बहुत से तरीके हैं। रेडियो और समाचर पत्र के साथ-साथ इंटरनेट एक बहुत आसान तरीका है दुनिया के हाल जानने का। और देखा जाए तो ये जरिये TV पर दिखाए जाने वाले समाचार चैनलों से ज्यादा भरोसेमंद हैं। हर व्यक्ति आजकल मोबाइल फोन की मदद से दुनिया से जुड़ा हुआ है। तो समाचार चैनलों की कमी बिलकुल नहीं खलती।

तो इन सब कारणों से विशेषज्ञ मानते हैं कि  समाचार चैनल अगले 5 साल में भारत से लुप्त हो जाएंगे।

हाल ही में टाइम्स नाउ के सबसे बड़े जौर्नालिस्ट अर्नब (Arnab Goswami) ने खुद का इंटरनेट न्यूज़ चैनल खोल लिया है। वे इसको अच्छी तरह से समझ गए की आजकल का मीडिया बिका हुआ है और उसका भविष्य अंधकारमय है (Future of News Media is dark!)। अर्नब को हर तरह के लोग जानते हैं और सभी को पता है की वे न्यूज़ की क्वालिटी के साथ कोम्प्रोमाईज़ (no compromise with quality) कभी नहीं करते थे।

जानिए कैसे हमारा मीडिया बिका हुआ है (How media is sold?)

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I am 21 years old boy from Faridabad, India. I am a freelance writer, blogger, and part-time singer.

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