Kya Hitler ki Maut 30 April 1945 ko nahin hui thi? Kya Hitler Bach Nikle The?

Kya Hitler ki Maut 30 April 1945 ko nahin hui thi? Kya Hitler Bach Nikle The?

अभी-अभी खबर मिली है कि हिटलर मर चुका है, मैं दोबारा कहता हूं हिटलर मर चुका (Hitler is dead!) है | जी हां दोस्तों, यह सूचना हिटलर की कथित मौत (Hitler’s Death) के कुछ घंटों बाद जर्मन के रेडियो स्टेशन पर सुनाई गई | परंतु इस मौत का कोई भी गवाह ऐसा मौजूद नहीं था कि जिस ने यह कहा हो कि मैंने हिटलर को मरते हुए देखा | तो क्या वास्तव में हिटलर की मौत उस बंकर में हुई थी? या फिर हिटलर 30 अप्रैल 1945 को जिंदा बच गए थे?

30 अप्रैल 1945 को जब सोवियत संघ बर्लिन को चारों ओर से घेर रहा था एडोल्फ हिटलर और उनकी पत्नी ईवा ब्राउन ने अपने बंकर में आत्महत्या कर ली | और 2 मई 1945 को सोवियत की सेना ने हिटलर के बंकर की तलाशी ली और जो कुछ अवशेष वहां बच्चे थे उन्हें हिटलर का समझकर मॉस्को (Moscow, Russia) शहर पहुंचा दिया गया | किसी ने कोई जांच नहीं कि, ना ही सोवियत संघ ने इस बात की पुष्टि करने की कोशिश की, क्या सच में ही वह हिटलर ही है जिसे मॉस्को भेजा गया है | कोई सीबीआई जांच नहीं, कोई सबूत नहीं, कोई गवाह नहीं, कोई फॉरेंसिक रिपोर्ट नहीं | साल 2014 में एफबीआई द्वारा जारी की गई कुछ फाइलों को डीक्लासीफाइ (declassified) करने के बाद कुछ एक्सपर्ट्स ने इस पर जांच की और अपनी इन्वेस्टिगेशन कि | Reports from BBC

Hitler's Death with Eva

उन एफबीआई फाइल्स के अनुसार हिटलर अपनी कथित मौत के बाद शुरुआती दिनों में अर्जेंटीना (Argentina) में देखा गया था |हिटलर की मौत को करीब 70 साल से भी ज्यादा हो चुके हैं | अब यह मामला बर्फ की तरह जम चुका है | ऐसे बहुत ही कम लोग जिंदा हैं जिन्होंने वाकई में हिटलर को देखा होगा | चराटा, अर्जेंटीना (Charata Argentina) से इन्वेस्टिगेशन की शुरुआत की गई जहां एक बहुत ही बुजुर्ग ऐसा गवाह मौजूद था जिसने चराटा में जर्मन समुदाय दूसरे विश्व युद्ध के दौरान देखा थे | साथ ही चराटा शहर में एक जर्मन समुदाय का एक स्कूल पाया गया जो कि द्वितीय विश्व युद्ध से पहले जर्मन आर्मी कैंप हो सकता था | जर्मनी से बहुत दूर अर्जेंटीना में एक जर्मन समुदाय का होना बहुत आश्चर्य की बात है |  इसके अलावा अर्जेंटीना में कई घरों में अंडरग्राउंड बंकर पाए गए जो कि 1935 से 1945 के बीच बनाए गए थे |

मिसिओनेस शहर अर्जेंटीना में फ़ूड कैंस (Food cans in Misiones, Argentina)

मिसिओनेस के जंगल के एक इलाके में खुदाई के दौरान बहुत सारे फ़ूड कैंस पाए गए | कैन की संख्या इतनी ज्यादा थी जिनसे पता चल रहा था कि कोई आदमी यकीनन ही यहां छुप कर रह रहा होगा | साथ ही चौंकाने वाली बात यह थी कि जितने भी सामान पाए गए वह सभी 1940s के बाद के ही थे | इसके अलावा कुछ नाज़ी जर्मनी की तस्वीरें, स्वास्तिक छपे हुए सिक्के, और एक हिटलर की तस्वीर भी खुदाई के दौरान मिली |
और सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह थी कि एक घने जंगल के बीचों-बीच पुराना खंडर पाया गया जो कभी आलीशान 2 बेडरूम सेट रहा होगा | उस जंगल से दूर-दूर तक कोई नहीं रहता था और वहां पर आने का कोई रास्ता भी नहीं था |

जंगल के बीच में माकन में बिजली का भी प्रबंध?

मकान की खास बात यह थी कि इसमें एक बाथ टब पाया गया जिसमें ग्लास टाइल आज भी मौजूद हैं और कमरों में आज भी पीले और नीले रंग की टाइल देखी जा सकती, हालांकि उनकी हालत खराब है परंतु वह मौजूद हैं | यहां तक कि टॉयलेट में टॉयलेट पेपर रोल रखने के लिए जगह थी | वाटर टैंक रखने की जगह मौजूद थी | मकान की खास बात यह थी कि वह ईट से नहीं बल्कि पत्थर से बना हुआ था | साफ बात है अगर बहुत भारी संख्या में शहर से ईट मंगाई जाती तो किसी न किसी को पता चल जाता परंतु अगर तीन या चार कारीगर जंगल के बीचो-बीच वहीं पर मौजूद पत्थरों से मकान बना रहे हैं तो किसी को खबर नहीं पड़ेगी | इसके अलावा उस घने जंगल में बिजली का भी प्रबंध किया गया था | बारिश के पानी को एक ऊंची जगह पर इकट्ठा कर कर अल्टरनेटर के जरिए बिजली बनाई गई होगी |

House in Jungle Hunting Hitler

आम बस्ती से बहुत दूर घने जंगल के बीचो-बीच एक आलीशान मकान वह भी 1940 में बहुत आश्चर्य की बात है | अगर यह 70s या 80s होता तो एक पल को माना जा सकता है कि यह किसी ड्रग्स डीलर के रहने की जगह होगी परंतु 40s में यकीनन ही कोई खास आदमी जिसे अपनी पहचान छुपानी हो वह रह रहा होगा | साथ ही, ठोस सबूत पाए गए हैं कि वह नाज़ी था |
आई अब नजर डालते हैं अडोल्फ़ हिटलर के चश्मदीद गवाहों के बयान पर | हिटलर की मौत के बाद माइकल मस्मानो (Michael Musmanno) के नेतृत्व में एक मीटिंग हुई जिसमें करीब 200 लोग मौजूद थे जिन्हें हिटलर की मौत का गवाह कह सकते थे | उसमें से ही कुछ बयान यहां पर मौजूद –

क्या लिंगे उस वक्त वहां मौजूद था जब हिटलर ने जहर खाया?
नहीं!

Linga with Hitler

परंतु लिंगे ने कहा कि वह तब मौजूद था जब हिटलर को बोरी म लपेट कर ले जाया जा रहा था | और उसने उस में हिस्सा लिया था |
लिंगे हिटलर का खास आदमी था | वह हमेशा हिटलर के साथ रहता था | यहां तक कि जब सुबह उठता था तो वह सबसे पहले लिंगे को ही देखता था |

क्या कैंपका ने हिटलर के मृत शरीर को देखा?
नहीं!

कैंपका हिटलर की धर्मपत्नी इवा ब्राउन को बंकर से बाहर निकालने वाला शख्स था | परंतु उसने अपने बयान में कहा कि हिटलर और इवा ब्राउन की बॉडी ढकी हुई थी | इसलिए यकीन से नहीं कह सकता कि जिनके शरीर बंकर से बाहर निकाले जा रहे थे वह वाकई में हिटलर (Hitler) और इवा ब्राउन (Eva Braun) थे |
यह दो लोग हिटलर की मौत के मुख्य गवाह थे और इनमें से किसी ने भी यकीन से नहीं कहा कि उन्होंने हिटलर को मरते हुए या मरने के बाद मृत अवस्था में देखा |

इसके अलावा कुछ और लोगों ने बयान में कहा कि किसी ने उस शरीर पर गैसोलीन (Gasoline means Petrol) डाल दिया था जिससे कि चेहरा जल चुका था और कोई भी यकीन से नहीं कह सकता कि 30 अप्रैल को बंकर से हिटलर को ही निकाला गया था | परंतु कोई तो मरा था किसी को तो सोवियत संघ की सेना ने मास्को शहर भेजा था | हो सकता है कि ओसामा बिन लादेन की तरह हिटलर ने अपनी ही तरह के दिखने वाले लोग रख रखे होंगे और उनमें से ही किसी को मार दिया होगा ताकि सब को लगे कि हिटलर की मौत हो चुकी है |

एक इंवेस्टिगेशन के दौरान उस अवशेष की जांच की गई जिसे बर्लिन से मॉस्को भेजा गया था यह कहकर कि वह हिटलर की बॉडी है | जांच से यह पता चला कि वह अवशेष किसी महिला के थे | इसका मतलब यह है कि वह कम से कम हिटलर को बर्लिन से मॉस्को नहीं भेजा गया था |

किसी ने भी हिटलर को मरते हुए नहीं देखा (No one could testify Hitler’s Death)

अब कम से कम इतना तो तय है कि किसी ने भी हिटलर को मरते हुए नहीं देखा और किसी ने भी हिटलर के मृत शरीर को नहीं देखा | साथ ही द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के बाद कोई बहुत ही खास आदमी अर्जेंटीना के एक जंगल के बीचो-बीच खुफिया तरीके से रह रहा था | अब सवाल आता है कि अगर हिटलर की मौत 30 अप्रैल 1945 को उस बंकर में नहीं हुई थी तो वह उस बनकर से किस तरह बाहर निकला और वह किस तरह जिंदा अर्जेंटीना पहुंचा |

Hitler's Last Public Apperance before Hitler's Death

बर्लिन शहर जर्मनी

जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर आखरी बार आम जनता के सामने अपने 56 वें जन्मदिन 20 अप्रैल 1945 को आए थे | उसके बाद किसी ने भी हिटलर को नहीं देखा | रेड आर्मी यानी कि सोवियत संघ की सेना बर्लिन शहर को चारों ओर से घेर रही थी और हिटलर की कथित मौत के 5 दिन बाद जर्मनी सेना ने आत्मसमर्पण किया था | 20 अप्रैल को रेड आर्मी कहां पर थी आप इस तस्वीर से अंदाजा लगा सकते हैं |

Red Army on 20th April 1945

जब  रेड आर्मी करीब आ रही थी तो हिटलर ने बर्लिन शहर के चारों ओर टैंक लगाकर अपने शहर की सुरक्षा करने की कोशिश की | इस नाकाबंदी की वजह से रेड आर्मी बर्लिन शहर में आसानी से नहीं घुस पाई और उसे शहर में घुसने में काफी दिन लगे | यह नाकाबंदी दो हिस्सों में थी पहला थोड़ी बाहर और दूसरी हिटलर के बंकर के थोड़ा करीब | और दूसरी नाकाबंदी के अंदर था टेंपलहोफ़ हवाई अड्डा | हवाई अड्डा बहुत ही छोटा था और केवल जरूरत पड़ने पर ही इस्तेमाल किया जाता था | जर्मनी सेना लड़ रही थी और रेड आर्मी धीरे धीरे बर्लिन को चारों ओर से घेरती हुई हिटलर के बंकर के करीब आ रही थी | 20 अप्रैल तक टेंपलहोफ़ हवाई अड्डा से सोवियत संघ की रेड आर्मी काफी दूर थी और वह हवाई अड्डा उड़ान भरने के लिए खाली था |

tempelhof airport in 1945

नौसेना के अफसर ने क्या कहा? (What did the navy officer say)

हिटलर के एक नौसेना सहायक ने अपने एक बयान में कहा कि उसने बर्लिन शहर हवाई यात्रा द्वारा 21 अप्रैल को छोड़ दिया था | बहुत अंधेरा था और रात के करीब 3:00 बज रहे थे | और भी कुछ जहाज टेंपलहोफ़ हवाई अड्डा से 21 अप्रैल को उड़े थे उनकी संख्या करीब 8 से 10 थी | इस तस्वीर पर आप नजर डाल सकते हैं

Navy Officer Comment on Hitler

एक हवाई जहाज चालक के बयान से यह पता चला था कि 21 अप्रैल को एडोल्फ हिटलर की प्राइवेट प्रॉपर्टी हवाई जहाज में भरकर टेंपलहोफ़ (Tempelhof Airport) हवाई अड्डे से रवाना हुई थी |

अब गौर करने की बात यह है कि क्या हिटलर ऐसा इंसान था कि वह इस बात का इंतजार करता कि कब सोवियत संघ की सेना उसके बंकर में घुसे की और कब वह आत्महत्या करेगा | जो इंसान दुनिया पर राज करने की नजर रखता हो वह आत्महत्या कर ले यह बात पचती नहीं है | साथ ही उसने किसी रोज सुबह उठकर यह नहीं कहा होगा कि मुझे अब बर्लिन शहर छोड़ना होगा | हिटलर काफी वक्त से इस चीज की तैयारी में था | इस बात के पुख्ता इंतजाम किए थे अगर उसे युद्ध के दौरान बर्लिन शहर छोड़ना पड़ा तो वह क्या-क्या करेगा | एक बात और दोस्तों आज भी जर्मनी में बर्लिन शहर के नीचे एक और बर्लिन शहर बसता है |

जी हां, हिटलर ने अपने राज्यकाल में कई सारे अंडरग्राउंड टनल बनवाए थे | और बर्लिन में तो करीब 90 मील तक लंबे टनल थे | हालांकि यह माना जाता है कि सोवियत संघ को इस बात की खबर थी कि बर्लिन में टनल है परंतु उसे यह नहीं पता था कि कहां पर है | तो अगर किसी को शांति से बिना किसी को खबर हुए उस बंकर से कुछ किलोमीटर दूर टेंपलहोफ़ हवाई अड्डे तक पहुंचना है तो है उन टनल का इस्तेमाल करेगा |

आज भी अगर आपके पास सही उपकरण है और सही दिमाग है तो आप टेंपलहोफ़ हवाई (Tempelhof airport) अड्डे तक पहुंचने वाली टनल को खोज सकते हैं | और इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि जहां आज एक सबवे पास बना हुआ है वहीं पर उस टनल का एक छोर खुलता है | अब अगर मान लेते हैं कि हिटलर टनल से होते हुए टेंपलहोफ़ हवाई अड्डे तक पहुंचा और उसने 21 अप्रैल 1945 को ही बर्लिन छोड़ दिया था तो वह कहां गया था और किस तरह वह अर्जेंटीना पहुंचा | अब यह वह वक्त नहीं था कि हिटलर जहां भी जाएगा उसका स्वागत किया जाएगा वक्त ऐसा था कि हिटलर को अपनी पहचान छुपानी थी और गुप्त तरीके से कहीं रहना था खाने पीने का इंतजाम और बाकी सभी इंतजाम पूरे खुफिया तरीके से करने थे और अब हिटलर को जरूरत थी कुछ खास लोगों की |

हिटलर की मौत के कुछ दिन बाद जर्मनी सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया था और उनके सभी हवाई जहाज सबमरीन, यू-बोट सोवियत संघ के कब्जे में थी परंतु 46 यू-बोट अभ भी लापता थी |

अमेरिका द्वारा जारी की गई एफबीआई फाइल्स से यह पता चलता है कि भारी संख्या में जर्मनीवासी द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के बाद स्पेन गए थे | स्पेन सिविल वॉर के दौरान अडोल्फ़ हिटलर ने फ्रांसिस्को फ्रेंको कि बहुत मदद की थी जो सिविल वॉर के बाद स्पेन के सैन्य तानाशाह रहे थे | फ्रांसिस्को फ्रेंको ने 1939 से लेकर जब तक उनकी मौत हुई (1975) तक स्पेन पर राज किया था | दूसरी भाषा में हम यह कह सकते हैं कि फ्रांसिस्को फ्रेंको को बनाने वाले एडोल्फ हिटलर थे | कुछ एक्सपर्ट्स की इंवेस्टिगेशन के दौरान यह भी पता चला है कि स्पेन के कुछ चुनिंदा शहरों में जर्मन कब्रिस्तान भी हुआ करते थे | और इस बात के पुख्ता सबूत आज भी मौजूद हैं |

पोर्ट ऑफ विगो, स्पेन (Port of Vigo, Spain)

यह शहर उन चुनिंदा शहरों में से एक है जहां पर 1944-45 जर्मनी ने बहुत ज्यादा मात्रा में पैसा इन्वेस्ट किया था | इस बात की जानकारी 1944 में गठन की गई अमेरिका द्वारा एक संस्था ने दी थी जिसकी रिपोर्ट को बाद में सार्वजनिक कर दिया गया था | इसी संस्था को बाद में सीआईए के नाम से जाना गया था | पोर्ट ऑफ विगो में रह रहे एक द्वितीय विश्व युद्ध विशेषज्ञ का कहना था कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद यहां पर जर्मन यु-बोट भारी संख्या में आई थी |

Port of Vigo Spain

पोर्ट ऑफ विगो स्पेन के पश्चिमी इलाके में है जो कि अटलांटिक महासागर से जुड़ा हुआ है | खास बात यह है कि वहां से जाने और आने के लिए हवाई, और पानी दोनों ही रास्ते खुले थे | तो वह हिटलर के लिए बहुत ही आदर्श इलाका था जहां पर रह सकता था और अर्जेंटीना तक जा सकता था |

समोस शहर स्पेन (Samos, Spain)

इस शहर में एक बहुत ही ऐतिहासिक मोनेस्ट्री है जो करीब 1400 से भी ज्यादा साल पुरानी है | यहां पर कुछ इतिहासकारों से बातचीत में यह पता चला कि इस मोनेस्ट्री में 1940 के बाद नाज़ी का आना जाना था | यहां पर उनकी आइडेंटिटी बदली जाती थी, उन्हें आगे जाने का रास्ता दिया जाता था और यह सब कुछ द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के बाद भी चलता रहा था |

यहां पर मौजूद एक इंसान का यह भी कहना था कि जब वह 18 साल का था तो उसने अपनी आंखों से खुद एडोल्फ हिटलर को यहां पर देखा था मतलब कि उस मोनेस्ट्री में देखा था | यह घटना 1 मई 1945 की थी | यानी हिटलर की कथित मौत के 1 दिन बाद |

samos monastry spain

समोस शहर स्पेन कि मोनेस्ट्री में आज भी ऐसी टनल मौजूद है जो उसे एक पास के मकान से जोड़ती है | एक बुजुर्ग आदमी से बात के दौरान यह पता चला कि उसने 1945 में मोनेस्ट्री कि एक सीक्रेट टनल कंस्ट्रक्शन कार्य में काम किया था | तब उसकी उम्र 15 साल थी |

इसके अलावा स्पेन में यू-बोट टनल आज भी मौजूद है जो कि 1940s मैं बनाई गई थी | ताज्जुब की बात यह है कि उस वक्त स्पेन पास यू-बोट नहीं थी, अगर आपके पास कोई ऐसी चीज है ही नहीं तो आप उसे रखने के लिए जगह क्यों बनाएंगे | साथ ही इस इंफ्रास्ट्रक्चर में बहुत पैसा लगा होगा और उस वक्त स्पेन की हालत बिल्कुल भी ठीक नहीं थी कि वह इस तरह के कार्य में पैसा खर्च करें यकीनन ही यहां जर्मन का हाथ था |

कैनरी द्वीप स्पेन (Canary Island, Spain)

इस द्वीप का इतिहास जर्मन की तरफ झुकता हुआ नजर आता है | स्पेनिश सिविल वॉर के बाद 1936 में फ्रांसिस्को फ्रेंको को इस द्वीप का जनरल कमांडेंट बना दिया गया था, जी हां वही फ्रांसिस्को फ्रेंको जिसकी मदद हिटलर ने की थी और वह बाद में स्पेन का तानाशाह बन गया था |

कैनरी द्वीप स्पेन के एक सुनसान इलाके में जो चारों ओर से पहाड़ों से घिरा हुआ है वहां पर एक विला मौजूद है | और इस बात के सबूत पाए गए हैं कि यहां पर यकीन ही जर्मन बेस रहा होगा | 56 वर्षीय एडोल्फ हिटलर अपने कथित मौत से पहले जरा बीमार थे उन्हें पेट की काफी परेशानियां थी | साथ ही 20 अप्रैल से लेकर 30 अप्रैल के बीच चले तनाव में वह और भी बीमार हो चुके होंगे | इस बात के आशंका पाई गई है कि हिटलर स्पेन से होते हुए कैनरी आयलैंड गए | उनके साथ दो महिलाएं और एक डॉक्टर था | और कैनरी द्वीप से होते हुए वह यू-बोट के के माध्यम से अर्जेंटीना पहुंचे |

जर्मनी से अर्जेंटीना (From Germany to Argentina)

अर्जेंटीना में हिटलर को एक ऐसे आदमी की जरूरत थी जिसके पास ढेर सारा पैसा हो और वह अर्जेंटीना में हिटलर को छुपने की जगह दें | यकीनन ही हिटलर को एक खास आदमी की जरूरत थी और वह था लहुसन | कुछ एफबीआई फाइल्स को डीक्लासिफाइ करने के बाद पता चला कि अर्जेंटीना में एक जर्मन कंपनी थी जिसका नाम था लहुसन कंपनी उसने खुफिया तरीके से नाज़ी मूवमेंट में हिस्सा लिया था जो कि वर्ल्ड वॉर 2 के बाद भी चली थी |

रिपोर्ट के अनुसार हिटलर यू बोट के जरिए स्पेन से चलकर कनेरी आयलैंड से होते हुए पेनिनसुला, अर्जेंटीना के तट पर पहुंचे | जब 5 मई 1945 को जर्मन आर्मी ने सरेंडर किया था तब करीब 46 यु बोट गायब थी, और वह जर्मनी से अर्जेंटीना के बीच अटलांटिक महासागर में घूम रही थी | यह बहुत ही ताज्जुब की बात है अगर जर्मनी सरेंडर कर चुका था तो फिर क्यों वह अर्जेंटीना की ओर जाना चाहता था यकीनन इसके पीछे कोई खास वजह कोई खास प्लान काम कर रहा था |

हिटलर लाहुसन की मदद से पेनिनसुला से सैन एंटोनियो ओस्टे पहुंचा और वहां से उसने एक ट्रेन पकड़ी जिससे वह सीधे अर्जेंटीना के दूसरे कोने बारीलोचे पर पहुंचा | बारीलोचे रेलवे स्टेशन पर की गई बातचीत के दौरान पता चला कि 1934 से लेकर अब तक सैन एंटोनियो ओस्टे से लेकर बारीलोचे ट्रेन चलती आ रही हैं और यह हमेशा से चलती आ रही है | साथ ही उस ने बताया कि काफी दशक पहले यहां पर प्राइवेट ट्रेनें भी चलती थी जिन्हें लहसुन के निर्देशक में चलाया जाता था |

इनअल्को हाउस मिस्ट्री (Residencia Inalco)

यह एक ऐसा घर है जो आज तक एक मिस्ट्री बना हुआ है | इस घर की लोकेशन बहुत ही अजीबोगरीब है और उसे वहां पर क्यों बनाया गया होगा यह कहना बहुत ही मुश्किल है | आप गूगल मैप पर सर्च कर सकते हैं ‘इनअल्को हाउस अर्जेंटीना’ और आप समझ जाएंगे यहां पर क्या बात हो रही है |

Hitler's Death

इस तस्वीर में आप देख सकते हैं यह घर तीन तरफ से जंगल से घिरा हुआ है और एक ही रास्ता पानी की तरफ खुला हुआ है | अफवाहों पर विश्वास करें तो किसी जमाने में वहां पर जर्मन लोग रहा करते थे यह बात सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद की है |

ला फल्डा शहर, अर्जेंटीना में गवाह (Testimonials about Hitler’s Death at La Falda)

इस शहर में एक चश्मदीद गवाह मिली जिसने द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के बाद ‘ला फल्डा’ शहर में हिटलर की निजी गतिविधियों में हिस्सा लिया था | इस महिला का नाम है कटालियन, उन्होंने बताया कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हिटलर यहां पर ईडन होटल के पास ईकोर्न के मकान म रहते थे | उस महिला ने बताया कि वह रोज हिटलर के लिए सुबह-सुबह नाश्ता लेकर और यह काम उन्होंने करीब 9-10 दिनों तक किया | महिला से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि इसके बाद हिटलर मंडल मेन्शन में चले गए थे |
अमेरिका द्वारा जारी की गई एफबीआई फाइल में भी इस बात का जिक्र है कि ला फल्डा शहर में हिटलर 10-15 दिन रहे थे | और साथ हि इडन होटल से लेकर ईकोर्न के घर तक खुफिया सुरंग बनाई गई थी, जिसके हाल ही में सबूत भी पाए गए |

मंडल एक इंसान था जिसका ला फाल्डा से 11 मील दूर एक बहुत बड़ा विला था और वह एक गोला बारूद की फैक्ट्री का मालिक था | यकीनन अर्जेंटीना में एक आर्मी तैयार की जा रही थी और यह बात बहुत ही साफ है | हिटलर उन इंसानों में से नहीं था जो आसानी से हार मान लेते थे वह बदला लेना चाहता था और वह एक आर्मी तैयार कर रहा था |

कैसिनो शहर में एफबीआई फाइल्स

कैसिनो शहर (Casino City, Brazil) ब्राजील, इस शहर में एफबीआई फाइल्स के अनुसार अटलांटिको होटल (Hotel Atlantico) में 5, 6, 7 फरवरी 1947 को एक म्यूजिकल शो हुआ था जिसकी पहली रात को कुछ खास लोग उसे देखने आए थे और उनमें हिटलर और उनकी पत्नी ब्राउन भी शामिल थी | इस बात को और पुख्ता करता है 5 फरवरी 1947 का एक अखबार जिसमें 6 और 7 तारीख को एक म्यूजिकल शो की बात की गई है | किसी भी अखबार में 5 तारीख को हुए म्यूजिकल शो की बात नहीं है, और यह जायज भी है अगर हाल ही के दिनों में कोई बड़ी फिल्म रिलीज होती है तो उसका एक प्री शो हो रखा जाता है जिसमें केवल चुनिंदा लोग ही आते हैं | तो ऐसा हो सकता है कि 5 तारीख को केवल चुनिंदा लोगों के लिए जिन पर न्योता हो वही शो को देखने आएंगे | इस बात के कुछ सबूत है कि कैसिनो शहर में नाज़ी लोगों का आना जाना था और यहां पर बहुत ऊंचे ऊंचे रेडियो एंटीना भी मौजूद थे जिनके मालिक कुछ नाज़ी परिवार थे |

कभी कभी अफवाहें भी सच होती हैं

कुछ अफवाहों की मानें तो हिटलर 1948 में बगोटा शहर (Bogota) जो कोलंबिया में स्थित है वहां पर भी गए थे | हालांकि इस बात का कोई पुख्ता सबूत नहीं है परंतु अफवाह बनने के लिए भी कुछ सच्चाई जरूरी होती है |
तो हिटलर द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के बाद अर्जेंटीना में घूम फिर कर उत्तर अमेरिका की ओर जा रहे थे | साथ ही वह एक न्यूक्लियर मिसाइल बनाने की तैयारी कर रहे थे और वह पलटवार को तैयार थे |

अब तक हमने जाना बर्लिन शहर में उस बंकर से होते हुए एक सुरंग टेम्पलहॉफ हवाई (Tempelhof Airport) अड्डा | जहां से हिटलर 21 अप्रैल 1945 को अपनी प्राइवेट प्रॉपर्टी के साथ उड़ान भरते हैं और सीधा स्पेन आते हैं | फ्रेंकोइस फ्रेंको की मदद लेकर हिटलर यू बोट के द्वारा कैनरी द्वीप से होते हुए अर्जेंटीना आते हैं | और वह अगले 2 साल अर्जेंटीना में कई जगह घूम फिर वह उत्तर अमेरिका की ओर रुख लेते हैं और ब्राजील से होते हुए कोलंबिया तक आते हैं और फिर वह लापता हो जाते हैं |

क्या हिटलर की मौत उस बंकर में हुई थी? (So what was the reason for Hitler’s Death?)

हिटलर की मौत वाकई में कब हुई यह तो हम नहीं कह सकते परंतु इस बात के कोई सबूत नहीं है कि हिटलर की मौत 30 अप्रैल 1945 को उस बंकर में हुई थी | हालांकि हमारे पास इस बात के सबूत है कि हिटलर 30 अप्रैल 1945 को बच निकले थे और उसके बाद वह किस तरह दक्षिण अमेरिका और उत्तर अमेरिका गए |

हिटलर अपने कथित मौत के वक्त 56 साल के थे और वह काफी बीमार भी थे | हो सकता है 1948 से 1950 के बीच उनकी मृत्यु हो गई हो या फिर उन्होंने किसी सुनसान जंगल के इलाके में अपना बाकी वक्त बिताया | पर इतना तो तय है कि हिटलर की मौत 30 अप्रैल 1945 को नहीं हुई थी |

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I am 21 years old boy from Faridabad, India. I am a freelance writer, blogger, and part-time singer.

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