फेसबुक के ग्रुप्स में कैसे ब्रैनवॉश होता है (How Facebook groups breed polarization)

फेसबुक के ग्रुप्स में कैसे ब्रैनवॉश होता है (How Facebook groups breed polarization)

फेसबुक ग्रुप्स की पॉलिटिक्स (Politics of Facebook Groups)

आम तौर पे ये (Facebook) ग्रुप्स अपने मुद्दे की बात करते हैं | लेकिन इलेक्शन का टाइम आते है ये अपना सही
रंग दिखते हैं| जैसे “हम इस देश के शासक है -Dr B R आंबेडकर” ग्रुप को ले लीजिये। ये पिछड़े वर्ग के भलाई की बात करती है और फिर इलेक्शन आने के टाइम पे मायावती का प्रचार।

उसी तरह ‘Say NO to Reservation System in India‘ (Facebook) ग्रुप जो है वो ऐसे तो आरक्षण के खिलाफ बोलती है | फिर इलेक्शन आने के टाइम पे बीजेपी के गुण गाने लगती है।

फिर एक ग्रुप है ‘गर्व ѕє कहो нυм हिन्दू нαι↳✔ग्रुप में अपने १०० मित्रों को जोड़े‘ उसमे भगवान के फोटोज और लिखे करने के लिए प्रेरित किया जाता है | और फिर सारे लोगो से फ़ोन ईमेल लेके उसे मार्केटिंग में इस्तेमाल किया जाता है | यहाँ पे भी काफी राइट विंग प्रोपेगंडा लांच होता है|

विश्लेषण (Critical Analysis)

Big Think में एक लेखक Jason Hreha इसका विश्लेषण करते हैं | ये human नेचर होता है की अगर कोई बात बार बार दुहरायी जाये तो फिर उसपे विश्वास होने लगता है। इसी कारन से अगर आप एक ग्रुप के पोस्ट काफी दिनों तक देखेंगे तो आपका दिमाग उसी को सच मानने लगेगा। वे बोलते हैं की इसका बस एक ही उपाय है की अपना अकाउंट डिसएबल कर दो। उनके काफी दोस्तों ने ऐसा किया और उनको मन की शांति प्राप्त हुई। वे काफी दिनों तक सोशल मीडिया के आदि हो गए थे।

आखिर डिवाइड एंड रूल का फंदा हमेशा काम आया है और आएगा | (Divide & Rule scheme in Facebook groups)

चाणक्य निति में किसी मसले को सुलझाने के लिए साम, दाम, दंड, और भेद जैसे उपाए बताये गए हैं। सबसे आखिरी में भेद बताया गया है। इसी को अंग्रेजी में “Divide and Rule” कहते हैं। इसके बलबूते पे अंग्रेज़ो ने भारत पे १५० साल तक राज़ किया था। वही निति सारे नेता अपनाते हैं। और अब उनके एजेंट फेसबुक (Facebook) ग्रुप बना के लोगो को ‘polarize’ करते हैं। सिर्फ फेसबुक ही नहीं बाकी सोशल मीडिया जैसे ट्विटर पे भी यही चल रहा है |

racism,divide

आप चाहे कोई भी विचारधारा के हो, वोट देना आपका निजी मामला है और इसमें जागरूकता से काम लें, फेसबुक ग्रुप के प्रोपेगंडा से नहीं। फेसबुक के पोस्ट को मनोरंजन के लिए इस्तेमाल करें, अपने विचारधारा बदलने के लिए नहीं, नहीं तो भारत को भी डोनाल्ड ट्रम्प जैसा कोई मिल जायेगा। Facebook के फेक न्यूज़ से बचें | ध्रुवीकरण  (polarization) से बचें |

EDIT: इस पोस्ट करने के कुछ ही दिनों बाद Cambridge Analytica का स्कैंडल सामने आया है। ये बात साबित करता है की ऑनलाइन मीडिया को काफी सोच समझ के इस्तेमाल करना चाहिए | भारत में भी इसका काफी प्रभाव हुआ है। काफी राजनितिक पार्टियां इसमें शामिल लगती है | हमने इसपे एक शानदार रिपोर्ट लिखी है और Ovleno कंपनी के वेबसाइट की फोटोज भी पब्लिश किये हैं जिससे काफी कुछ पता चलता है। 

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